आपका खाना पचता है या - सड़ता-है,जान लीजिए! Is your digestion good..

नमस्कार दोस्तों,
आज आपको आपके स्वास्थ्य जीवन से जुड़ी ऐसी जानकारी मिलने वाली है जिसे जानकर आपका पूरा जीवन बदल जाएगा। और ये जानकारी हमें आयुर्वेद के एक ग्रंथ अष्टाङ्गहृदयम् से मिली है जो कि संस्कृत में लिखा गया है और 3000 वर्ष पुराना है। दोस्तों आज के दौर में हर एक व्यक्ति किसी ना किसी बिमारी से ग्रस्त होता जा रहा है और हजारों लाखों रुपए इन बीमारियों को ठीक करने में।
खर्च कर रहा है। मगर व्यक्ति एक बार भी अपने दैनिक दिनचर्या में जाकर नहीं देखता है कि आखिर वो ऐसा क्या कारण है जिससे उसको यह सब दुख, तकलीफें झेलनी पढ़ रही है। संपूर्ण सुख और आनंद की प्राप्ति के लिए लोग धन कमाने में लगे रहते हैं पर वो ये नहीं जान पाते हैं कि सबसे बड़ा धन तो उसका स्वास्थ्य है। अगर वह सवस्थ है तो उससे बड़ा धनी कोई नहीं है। इस बात को बहुत ही कम लोग समझ पाते हैं। आपको आपका जीवन बदलना ही होगा, नहीं तो आप ऐसे ही
दोस्तों पुस्तक से लिखा गया पहला नियम है सुबह उठते ही सबसे पहले हल्का गर्म पानी पीएं। दो से तीन गिलास और पानी हमेशा बैठकर घूंट घूंट करके पिएं। घूंट घूंट कर इसलिए पीना है ताकि सुबह की जो मुँह की लार है। इसमें औषधीय गुण बहुत है और ये लार पेट में जानी चाहिए। वो तभी संभव है जब आप पानी बिल्कुल घुट घुटकर मुँह में घुमाकर पियेंगे। दोस्तों आप थूको ऐसा ही ना समझे, क्योंकि इसी स्ट्रांग हर दिन पुस्तक में केवल थूक पर ही 1800 लिखे गए हैं।

तो इनसे बचने के लिए आपको सुबह पानी जरूर पीना है। दोस्तों दूसरा नियम है खाना खाने के तुरंत बाद पानी नहीं पीना। दोस्तों आयुर्वेद में खाने के तुरंत बाद पानी पीना, जहर पीने के सामान बताया गया है,और इसका उदाहरण भी इस पुस्तक में बताया गया है जो इस प्रकार है।
दोस्तों जैसे ही हम भोजन करते हैं तो वो भोजन हमारे पेट में जाता है। हमारे पेट में एक जगह है जिसे हम कहते हैं और कोई इसे जफर भी कह देते हैं। इस जठर में हमारा भोजन जाकर इकट्ठा होता है और जैसे ही हमारा भोजन में इकट्ठा होता है तो वहाँ एक अग्नि जलती है, जिसे जठराग्नि कहते हैं और फिर ही पचाने की क्रिया शुरू होती है और ये ही हमारे भोजन को पचाती है। पचने के इस क्रिया में आप जब पानी पी लेते हैं, तो यह जठराग्नि ,मंद पड़ जाती है या तो रुक जाती है
जिसके कारण आपके द्वारा किया गया भोजन पूर्ण रूप से पचा नहीं पाता है और जब भोजन पचेगा नहीं तो सड़ेगा और वो सड़ा हुआ खाना शरीर में 100 से ज्यादा विश पैदा करेगा और वो विश आपको बीमार करेगा। दोस्तों भोजन के इस खेल को आपको समझना ही होगा तभी आप पूर्ण रूप से सवस्थ रह पाएंगे। इसलिए जब भी आप भोजन करें तो भोजन के तुरंत बाद पानी कभी ना पिएं। दोस्तों, आपके मन में एक सवाल आ रहा होगा कि भोजन के बाद पानी तो नहीं पीएंगे?
ये खाना खाने के बाद पानी तो नहीं पीएंगे, कोई और चीज़ पी सकते हैं क्या? खाना खाने के बाद दोस्तों, आयुर्वेद के ग्रंथ अष्टाङ्गहृदयम् के अनुसार भोजन के बाद पीने वाली तीन चीजें आती हैं जूस, छाछ और दूध। इसमें भी अगर आप सुबह भोजन करते हैं तो जूस पीना अच्छा दिन में भोजन करते हैं तो छाछ दही, लस्सी पीना अच्छा और रात्रि में भोजन के बाद दूध पीना अच्छा। इन तीनों के कर्म को कभी उल्टा पुल्टा नहीं करना है। इस बात का विशेष ध्यान रखें फल सुबह ही खाएं।
ये सही पानी का गुण भी होता है। जैसे ही पानी को हम किसी चीज़ में मिलाते हैं तो पानी अपना गुण धर्म भूल कर उस अवस्था में आ जाता है जिसमें हम लाना चाहते है। दोस्तों पानी का कोई रंग नहीं है। इसको आप जिंस किसी भी चीज़ में मिलाएंगे तो यह उसके गुण को धारण कर लेगा।
दोस्तों। अभी थोड़ी देर पहले आपको बताया था कि सुबह फल खाना अच्छा दिन में छाछ पीना अच्छा
और रात्रि में दूध पीना अच्छा, लेकिन कोई भी व्यक्ति इस क्रमबद्ध तरीके से आहार नहीं लेते है। जैसा मर्जी आया वैसा खाते हैं और फिर बीमार पड़ते हैं दोस्तों अभी जो मैं आपको बताने वाला हूँ इस बात को ध्यान से समझिए। हमारा शरीर त्रिदोष आधारित शरीर है। वातपित्त काफ ये हमारे शरीर के तीन दोष है और इनका हमारे शरीर में संतुलन रहना बहुत जरूरी है। इनके असंतुलन से ही समस्त रोगों की शुरुआत होती है। जब हम सुबह उठते हैं तो हमारे शरीर में कफ दोष अधिक बढ़ा हुआ होता है।
इसलिए आयुर्वेद में सुबह ऐसी चीजों को खाने के लिए कहा जाता है जो दोषों का नाश करती हो। 28 रोग कफ दोष बढ़ने के कारण हमारे शरीर में आते हैं सर्दी, खांसी, जुकाम से लेकर सिर दर्द, आलस्य, भूख ना लगना,और भी बहुत कुछ..
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